International Relations | 2015-12-25 13:15:00

1. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से आप क्या समझते हैं?
 रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है किसी देश की यह क्षमता और अधिकार कि वह अपनी विदेश नीति, रक्षा नीति, सुरक्षा रणनीति और आर्थिक फैसले स्वतंत्र रूप से ले सके, बिना किसी दूसरे देश, महाशक्ति या सैन्य-राजनीतिक गुट के दबाव में आए। इसका मतलब यह नहीं है कि देश अकेला रहना चाहता है, बल्कि यह कि वह सहयोग अपने हितों के अनुसार करे, न कि मजबूरी में।

भारत के संदर्भ में रणनीतिक स्वायत्तता

भारत की विदेश नीति की मूल सोच यही रही है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हों। आज की बहुध्रुवीय (Multipolar) दुनिया में भारत अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान, खाड़ी देशों और आसियान—सबसे संबंध रखता है, लेकिन किसी एक गुट का स्थायी हिस्सा नहीं बनता। यही रणनीतिक स्वायत्तता का व्यवहारिक रूप है।

इसके प्रमुख आयाम

  • विदेश नीति में स्वतंत्रता: भारत वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण से निर्णय लेता है, चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इज़राइल-फिलिस्तीन मामला।

  • रक्षा और सुरक्षा: भारत हथियार खरीद में विविधता रखता है—अमेरिका, रूस, फ्रांस और स्वदेशी उत्पादन—ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न हो।

  • आर्थिक नीति: भारत व्यापार, निवेश और ऊर्जा आयात में अपने हितों के अनुसार फैसले करता है, भले ही उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव हो।

महत्व

रणनीतिक स्वायत्तता भारत को मोहरा बनने से बचाती है, उसकी वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ाती है, और उसे बदलती वैश्विक राजनीति में लचीला और प्रभावशाली खिलाड़ी बनाती है।