Society & Social Justice | 2016-12-25 16:45:00

1. Environmental Justice (पर्यावरणीय न्याय) की अवधारणा

Environmental Justice का अर्थ है कि पर्यावरण से मिलने वाले लाभ और पर्यावरणीय नुकसान समाज के सभी वर्गों में समान रूप से वितरित हों। इसका मूल सिद्धांत यह है कि कोई भी समुदाय—विशेषकर गरीब, हाशिए पर रहने वाले और कमजोर वर्ग—प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षरण या जलवायु जोखिमों का असमान बोझ न उठाए। यह अवधारणा पर्यावरण संरक्षण को मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जोड़ती है।

2. भारत में Environmental Justice के संवैधानिक आधार

  •  अनुच्छेद 21 – जीवन का अधिकार
  • न्यायपालिका ने जीवन के अधिकार में
  • स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण,
  • स्वच्छ वायु,
  • स्वच्छ जल
  • को शामिल किया है।
  • प्रमुख निर्णय:
  • MC Mehta बनाम Union of India
  • Subhash Kumar बनाम State of Bihar

अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार : यदि कुछ सामाजिक समूहों को प्रदूषण और पर्यावरणीय जोखिमों का अधिक सामना करना पड़े, तो यह कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

अनुच्छेद 15 – भेदभाव का निषेध: किसी विशेष सामाजिक या आर्थिक वर्ग को पर्यावरणीय क्षति का शिकार बनाना अप्रत्यक्ष भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है।

अनुच्छेद 48A – राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत: राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का संवैधानिक निर्देश देता है।

अनुच्छेद 51A(g) – नागरिकों का मूल कर्तव्य प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण, वन,नदियाँ,वन्यजीव की रक्षा करे।

3. Environmental Justice को समर्थन देने वाले न्यायिक सिद्धांत

  • Polluter Pays Principle→ प्रदूषण करने वाला ही पर्यावरणीय क्षति की भरपाई करेगा।
  • Precautionary Principle→ पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता न होने पर भी पूर्व-निवारक कदम उठाए जाने चाहिए।
  • Sustainable Development→ आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है।