Society & Social Justice | 2022-12-25 13:22:00

 

1. अनुच्छेद 19(1)(g) – पेशा अपनाने की स्वतंत्रता

  • वकीलों को अपना पेशा स्वतंत्र रूप से करने का मौलिक अधिकार है।
  • अगर जांच एजेंसियां बिना ठोस कारण वकीलों को बार-बार समन जारी करें, तो यह उनके पेशे की स्वतंत्रता में बाधा बनता है।
  • डर या दबाव में काम करना इस अधिकार के मूल भाव के खिलाफ है।

2. अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार

  • अनुच्छेद 21 में निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और न्याय तक पहुंच (Access to Justice) शामिल है।
  • स्वतंत्र वकील ही किसी आरोपी या पीड़ित को निष्पक्ष न्याय दिला सकते हैं।
  • यदि वकीलों को परेशान किया जाए, तो इसका सीधा असर न्याय पाने के अधिकार पर पड़ता है।

अनुच्छेद 14 – कानून के समक्ष समानता

  • सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण का अधिकार है।
  • यदि कुछ मामलों में वकीलों को डराकर या दबाव में लाया जाए, तो यह न्यायिक प्रक्रिया में असमानता पैदा करता है।
  • इससे न्याय प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित होती है।

Rule of Law (कानून का शासन)

  • कानून का शासन संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
  • वकील नागरिक और न्यायपालिका के बीच सेतु का काम करते हैं।
  • यदि वकील स्वतंत्र नहीं होंगे, तो राज्य की शक्ति मनमानी बन सकती है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता

  • स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए स्वतंत्र बार (Bar) का होना अनिवार्य है।
  • वकील न्यायालय को तथ्यों और कानून की सही व्याख्या में सहायता करते हैं।
  • वकीलों पर दबाव डालना परोक्ष रूप से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करता है।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Natural Justice)

  • प्राकृतिक न्याय का अर्थ है बिना डर, पक्षपात और बाहरी दबाव के सुनवाई।
  • वकीलों को अपने मुवक्किल का बचाव करने पर अपराधी की तरह ट्रीट करना अनुचित है।
  • अनावश्यक समन प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।

शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत (Separation of Powers)

  • जांच एजेंसियां कार्यपालिका के अधीन होती हैं।
  • वकीलों के काम में अत्यधिक दखल कार्यपालिका और न्यायपालिका के संतुलन को बिगाड़ता है।
  • इसलिए न्यायिक निगरानी आवश्यक होती है।

न्याय तक पहुंच (Access to Justice)

  • संविधान सभी को न्याय दिलाने का वादा करता है।
  • यदि वकील संवेदनशील मामलों से डरने लगें, तो कमजोर वर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है।
  • इससे सामाजिक और कानूनी न्याय दोनों कमजोर पड़ते हैं।

बार की स्वायत्तता और पेशेवर नैतिकता

  • वकीलों की स्वतंत्रता उन्हें पेशेवर नैतिकता बनाए रखने में मदद करती है।
  • सरकारी हस्तक्षेप से बार की स्वायत्तता और जनता का भरोसा दोनों कमजोर होते हैं।