International Relations | 2022-12-25 14:00:00


परिचय

  • आज की दुनिया में हालात तेज़ी से बिगड़ते नज़र आ रहे हैं। कहीं रूस और यूक्रेन की जंग चल रही है, कहीं इजराइल और ईरान के बीच तनाव है, तो कहीं चीन और ताइवान आमने-सामने खड़े हैं। इन सबके बीच एक बात बार-बार सुनाई दे रही है—परमाणु हथियार।
  • अब सवाल उठता है कि जब इतने देश परमाणु हथियारों की बात कर रहे हैं या उन्हें मज़बूत कर रहे हैं, तो क्या यह तीसरे विश्व युद्ध का संकेत है?

परमाणु हथियार कहां से आए?

  • परमाणु हथियारों की शुरुआत 1945 में हुई, जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए। पूरी दुनिया ने देखा कि एक बम कितना भयानक नुकसान कर सकता है।
  • इसके बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध शुरू हुआ, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे से ज़्यादा परमाणु हथियार बनाने की होड़ में लग गए।
  • बाद में NPT समझौता हुआ, ताकि परमाणु हथियारों को फैलने से रोका जा सके। लेकिन भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया जैसे देशों ने इससे बाहर रहकर परमाणु ताकत बना ली।

आज परमाणु हथियारों की बात फिर क्यों हो रही है?

  • आज हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया कि परमाणु धमकी अब भी काम करती है।
  • मध्य-पूर्व में इजराइल और ईरान के बीच टकराव बढ़ रहा है।
  • चीन और ताइवान को लेकर एशिया में चिंता बनी हुई है।
  • इन सब वजहों से देश सोच रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़े तो खुद को कैसे बचाएं। इसी डर में कई देश अपने परमाणु हथियारों को मज़बूत कर रहे हैं।

लोग और एक्सपर्ट क्या सोचते हैं?

  • कई सर्वे बताते हैं कि लोग मानने लगे हैं कि आने वाले सालों में बड़ा युद्ध हो सकता है।
  • कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि दुनिया अब मल्टीपोलर हो चुकी है, यानी कोई एक देश सब कुछ कंट्रोल नहीं करता। ऐसे में टकराव बढ़ने का खतरा रहता है।
  • लेकिन कई जानकार यह भी कहते हैं कि परमाणु हथियार होने का मतलब युद्ध होना नहीं है।

क्यों नहीं?

  1. क्योंकि परमाणु युद्ध में कोई जीतता नहीं, सब कुछ तबाह हो जाता है।
  2. बड़े देश जानते हैं कि पहला हमला करने का मतलब खुद का नुकसान है।
  3. इसलिए देश सीधे युद्ध की बजाय दबाव, प्रतिबंध और प्रॉक्सी लड़ाइयों का रास्ता चुनते हैं।

फिर डर क्यों है?

  1. क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ी तबाही बन सकती है।
  2. हथियारों की दौड़ से भरोसा खत्म होता जा रहा है।
  3. बातचीत और समझौते कमजोर पड़ रहे हैं।

निष्कर्ष

  • परमाणु हथियारों की बढ़ती चर्चा यह नहीं कहती कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने वाला है,
  • लेकिन यह ज़रूर बताती है कि दुनिया असुरक्षित और बेचैन दौर में पहुंच चुकी है।
  • अगर देश समय रहते बातचीत, कूटनीति और शांति का रास्ता अपनाएं, तो हालात संभाले जा सकते हैं।
  • क्योंकि परमाणु युद्ध में हार-जीत नहीं होती—सिर्फ़ नुकसान होता है, वो भी पूरी मानवता का।