स्वदेशी पिनाका रॉकेट के निर्यात की शुरुआत भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, और आर्मेनिया इसका पहला खरीदार बना है. यह भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमताओं और "आत्मनिर्भर भारत" (आत्मनिर्भर भारत) अभियान की सफलता को दर्शाता है.
डिफेंस प्रोडक्शन में भारत की स्थिति: भारत ने हाल के वर्षों में रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है:
रिकॉर्ड उत्पादन: वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ (लगभग 18.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया. यह 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से 174% की वृद्धि है.
घरेलू उत्पादन में वृद्धि: 2014-15 में 30-35% की तुलना में, 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर 65% हो गया है.
निजी क्षेत्र की भागीदारी: कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान 21-23% है, और सरकार का लक्ष्य इसे जल्द ही 50% या उससे अधिक तक बढ़ाना है. रक्षा विनिर्माण में 16,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) सक्रिय हैं.
रक्षा औद्योगिक गलियारे: स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं, जिन्होंने ₹9,145 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है.
रक्षा निर्यात में भारत की स्थिति: भारत एक प्रमुख रक्षा आयातक से एक निर्यातक देश के रूप में तेजी से उभर रहा है:
निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ (लगभग 2.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है. यह वित्तीय वर्ष 2023-24 के ₹21,083 करोड़ से 12.04% अधिक है.
एक दशक में वृद्धि: 2014 में ₹1,000 करोड़ से भी कम के निर्यात की तुलना में, 2024-25 में यह आंकड़ा 23 गुना से अधिक बढ़ गया है.
वैश्विक पहुंच: भारत अब अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया सहित 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात करता है. निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में गोला-बारूद, हथियार, उप-प्रणालियाँ/प्रणालियाँ और पुर्जे शामिल हैं.
स्वदेशी उत्पादों का योगदान: हल्के लड़ाकू विमान तेजस, आकाश मिसाइल प्रणाली और एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी उत्पाद इस सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
पिनाका रॉकेट निर्यात का महत्व: स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली का आर्मेनिया को निर्यात भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह दर्शाता है कि भारत अब न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर रहा है. यह निर्यात एक निजी कंपनी द्वारा निर्मित गाइडेड पिनाका रॉकेट की पहली खेप के साथ हुआ है, जो रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी उजागर करता है. आर्मेनिया ने लगभग दो साल पहले पिनाका रॉकेट प्रणाली के लिए ऑर्डर दिया था.
भविष्य के लक्ष्य: भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
उत्पादन लक्ष्य: 2029 तक ₹3 लाख करोड़ (लगभग 36 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का रक्षा उत्पादन हासिल करना.
निर्यात लक्ष्य: 2029 तक ₹50,000 करोड़ (लगभग 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का रक्षा निर्यात हासिल करना. कुल मिलाकर, भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.