Economy | 2020-01-26 14:18:00

क्या हुआ?

चांदी की कीमतों ने हाल ही में भारतीय बाजारों में एक उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो 14 महीनों में ₹1 लाख से ₹2 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंचने और फिर एक ही महीने में ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति किलोग्राम को पार करने के उपयोगकर्ता के विवरण से मेल खाती है. जनवरी 2026 में, चांदी की कीमतें ₹3 लाख प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गईं, और 19 जनवरी, 2026 को ₹3,05,000 प्रति किलोग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गईं.

चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

 

भू-राजनीतिक तनाव:

वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक संघर्षों और व्यापार शुल्क संबंधी खतरों (जैसे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूरोपीय देशों के खिलाफ लगाए गए शुल्क) ने चांदी जैसी सुरक्षित-हेवन परिसंपत्तियों की मांग बढ़ा दी है.

मजबूत औद्योगिक मांग:

चांदी के व्यापक औद्योगिक अनुप्रयोग हैं, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), सौर पैनल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर जैसे "सनराइज सेक्टर" में. 2024 में लगातार चौथे वर्ष औद्योगिक मांग एक नए रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई.

आपूर्ति में कमी:

चांदी का बाजार कई वर्षों से आपूर्ति घाटे का सामना कर रहा है, जिसमें 2024 में लगातार चौथे वर्ष वैश्विक मांग आपूर्ति से अधिक रही है.

कमजोर अमेरिकी डॉलर:

एक नरम अमेरिकी डॉलर गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए वस्तुओं को सस्ता बनाता है, जिससे मांग बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय तथा भारतीय बाजारों में कीमतों को समर्थन मिलता है.

मुद्रास्फीति और ब्याज दर संबंधी चिंताएं:

लगातार मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं और भविष्य की ब्याज दर प्रक्षेपवक्र के बारे में अनिश्चितता भी चांदी जैसी कीमती धातुओं को क्रय शक्ति के क्षरण के खिलाफ बचाव के रूप में आकर्षक बनाती है.

निवेश मांग:

ईटीएफ और खुदरा निवेशकों से बढ़ती रुचि, साथ ही "FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) से प्रेरित रैली" ने भी कीमतों में उछाल में योगदान दिया है.

कम मूल्यांकन की स्थिति:

सोने की तुलना में चांदी को अभी भी कम मूल्यांकित माना जाता है, जो उच्च वृद्धि क्षमता चाहने वाले निवेशकों के लिए इसे आकर्षक बनाता है.

भारत में घरेलू मांग:

भारत में बढ़ती आय के कारण चांदी के आभूषणों और बर्तनों की मांग में वृद्धि हुई है. इसके अतिरिक्त, भारत अपनी अधिकांश चांदी का आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ती हैं. इन कारकों के संयोजन से चांदी की कीमतों में हाल के वर्षों में तेजी से वृद्धि हुई है.