Society & Social Justice | 2001-03-26 22:15:00

NCERT की कक्षा 8 की किताबों को लेकर हाल ही में उठे विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। पहले तो नई किताब में "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार" वाले अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कार्रवाई की और किताब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन अब एक और पुरानी किताब (2007-2026 तक इस्तेमाल) पर नई याचिका दाखिल हो गई है। यह विवाद NCERT की पाठ्यक्रम सामग्री की निष्पक्षता और न्यायपालिका की छवि से जुड़ा है।

 

पहले क्या हुआ? (पृष्ठभूमि)

 

  • फरवरी 2026 में NCERT ने कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में एक नया अध्याय जोड़ा: "The Role of the Judiciary in Our Society"।
  • इसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, केस बैकलॉग और अन्य मुद्दों का जिक्र था।
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने सुओ मोटू (खुद संज्ञान) लेते हुए इसे "न्यायपालिका पर हमला", "गहरी साजिश" और "बच्चों को एकतरफा राय देने वाला" बताया।
  • कोर्ट ने कहा: "गोली चलाई गई है, न्यायपालिका खून बहा रही है" और "माफी काफी नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए"।
  • NCERT ने माफी मांगी, किताब वापस ली और अध्याय हटाने की बात कही, लेकिन कोर्ट ने पूर्ण बैन लगा दिया: सभी फिजिकल और डिजिटल कॉपी जब्त, प्रकाशन/प्रसार पर रोक, और NCERT निदेशक + शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस।
  • कोर्ट ने विवादित अध्याय लिखने वालों के नाम और योग्यता भी मांगी।

 

अब नई याचिका: क्या है मामला?

 

  • डॉ. पंकज पुष्कर (पूर्व NCERT सीनियर एसोसिएट फेलो और किताब लेखन प्रक्रिया से जुड़े रहे) ने सुप्रीम कोर्ट में नई रिट याचिका (Diary No. 13060/2026) दाखिल की है।
  • यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 और 129 के तहत दायर है।
  • विवादित किताब: Social and Political Life – III (कक्षा 8, सोशल साइंस, 2007-2016 एडिशन, 2026 तक इस्तेमाल)।
  • मुख्य आपत्ति: किताब के पेज 62 पर एक पैराग्राफ, जिसमें कहा गया है कि "हाल के फैसलों में झुग्गी-झोपड़ी वासियों को शहर में अतिक्रमणकारी माना जाता है" (Judgments tend to view slum dwellers as encroachers)।
  • याचिकाकर्ता का दावा:
    • यह वाक्य चयनात्मक (selective) है और सुप्रीम कोर्ट के अतिक्रमण/निष्कासन से जुड़े फैसलों को गलत तरीके से पेश करता है।
    • इससे न्यायपालिका की छवि खराब होती है, क्योंकि संवैधानिक/कानूनी संदर्भ (जैसे अधिकार, पुनर्वास) नहीं दिए गए।
    • बच्चों को गलत/एकतरफा जानकारी दी जा रही है, जो गैर-संवैधानिक और अनुचित है।
  • यह याचिका उसी समय दाखिल हुई जब पुराने विवाद (भ्रष्टाचार अध्याय) पर सुनवाई जारी है—कई इसे "एक और हमला" या "जवाबी कार्रवाई" मान रहे हैं।

 

क्या प्रभाव पड़ा?

 

  • NCERT पहले ही विवादित नई किताब वापस ले चुका है और संशोधित संस्करण 2026-27 सेशन के लिए तैयार कर रहा है।
  • नई याचिका पर अभी सुनवाई बाकी है, लेकिन यह NCERT की किताबों की समीक्षा प्रक्रिया, सामग्री की निष्पक्षता और न्यायपालिका की गरिमा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवाद शिक्षा में राजनीतिक/संस्थागत हस्तक्षेप बढ़ा सकते हैं।