बढ़ती महंगाई के दौर में 10 हजार रुपये की मासिक आय वाले लोगों के लिए गुजारा करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे उनकी जीवनशैली पर गहरा असर पड़ता है. महंगाई के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है.
कम वेतन वालों की जीवनशैली और चुनौतियाँ:
- आवास: शहरों में कम आय वाले लोग अक्सर सस्ते और छोटे कमरों में रहते हैं, जहाँ पूरा परिवार एक साथ रहता है ताकि खर्च कम किया जा सके.
- परिवहन: पैसे बचाने के लिए वे पैदल चलते हैं, साइकिल का इस्तेमाल करते हैं या बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं. मेट्रो जैसे महंगे विकल्प उनकी पहुँच से बाहर होते हैं.
- भोजन: बाहर खाना खाना उनकी पहुँच से बाहर होता है. वे आमतौर पर घर पर ही खाना बनाते हैं.
- मानसिक तनाव: कम वेतन में पूरे परिवार का खर्च चलाने की चिंता से महीने की शुरुआत से अंत तक मानसिक दबाव बना रहता है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है.
- बुनियादी जरूरतें: दैनिक आवश्यकताएँ पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है.
बढ़ती महंगाई में गुजारा करने और बचत के तरीके: कम आय में भी लोग कुछ रणनीतियों को अपनाकर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं:
1. बजट बनाना: महीने की शुरुआत में ही एक निश्चित बजट तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है. इससे खर्चों को ट्रैक करने और यह समझने में मदद मिलती है कि पैसा कहाँ जा रहा है, जिससे अनावश्यक खर्चों में कटौती की जा सकती है.
2.जरूरतों और चाहतों में अंतर समझना: मोबाइल का नया मॉडल या ब्रांडेड कपड़े जैसी 'चाहतों' की जगह किराया, राशन, बच्चों की फीस और दवाइयों जैसी 'जरूरतों' को प्राथमिकता देना चाहिए, खासकर जब आय सीमित हो.
3. अनावश्यक खर्चों में कटौती: फिजूलखर्ची से बचना चाहिए, जैसे अनावश्यक ऑनलाइन शॉपिंग या ऐसे सब्सक्रिप्शन (ओटीटी प्लेटफॉर्म, फूड ऐप्स) को बंद करना जिनका उपयोग नहीं होता है. बाहर खाने या तंबाकू जैसी आदतों पर खर्च कम करना भी बचत में मदद करता है.
4. 'पहले बचाओ, बाद में खर्च करो' का नियम: सैलरी आते ही उसका एक निश्चित हिस्सा (जैसे 20,000 की सैलरी में से 1000-2000 रुपये) बचत के लिए अलग रख देना चाहिए.
5. 24 घंटे का नियम: कोई भी बड़ी चीज खरीदने से पहले 24 घंटे का इंतजार करना चाहिए और सोचना चाहिए कि क्या वाकई उसकी जरूरत है.
6. स्मार्ट खरीदारी: खरीदारी करते समय कूपन या डिस्काउंट का उपयोग करें और सेल के दौरान खरीदारी करें. किराने का सामान खरीदते समय पहले से सूची बना लेने से अनावश्यक चीजें खरीदने से बचा जा सकता है.
7. क्रेडिट कार्ड और कर्ज से बचें: क्रेडिट कार्ड का सीमित और विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें ताकि उच्च ब्याज दरों और ईएमआई के जाल से बचा जा सके. पुराने कर्ज को जल्द से जल्द चुकाने पर ध्यान दें.
8. आय बढ़ाने के तरीके तलाशें: यदि संभव हो, तो अधिक मांग वाले क्षेत्र में कौशल विकसित करके या पदोन्नति के लिए प्रयास करके अपनी आय बढ़ाने के बारे में विचार करें. कुछ विशेषज्ञ साइड इनकम के रास्ते तलाशने की भी सलाह देते हैं.
9. नियमित बचत की आदत: भले ही शुरुआत में छोटी राशि हो (जैसे 100 रुपये प्रति सप्ताह या 100 रुपये प्रति माह), नियमित रूप से बचत करने की आदत डालनी चाहिए.
10. 40-30-20-10 फॉर्मूला: कुछ विशेषज्ञ 40-30-20-10 के फॉर्मूले का सुझाव देते हैं, जिसमें 40% जरूरी खर्चों (किराया, भोजन, बच्चों की फीस) के लिए, 30% कर्ज चुकाने के लिए, 20% मनोरंजन/घूमने-फिरने के लिए और 10% भविष्य की बचत या आपातकाल के लिए निर्धारित किया जाता है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बढ़ती महंगाई के कारण भारत में 55% से अधिक कर्मचारी यह महसूस करते हैं कि उनकी आय बढ़ते घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, देश में सालाना 6 से 7 प्रतिशत महंगाई बढ़ रही है, जबकि रियल वेजेस में 2019 से ठहराव आया है और जून 2024 तक इसमें 1.7% की गिरावट देखी गई है.