Science & Technology | 2006-04-26 09:04:00

CSEL का पूरा नाम है Combat Survivor Evader Locator (कॉम्बैट सर्वाइवर इवेडर लोकेटर)।  यह अमेरिकी वायुसेना और मिलिट्री पायलटों के लिए बना एक छोटा, हैंडहेल्ड सैटेलाइट रेडियो डिवाइस है। Boeing कंपनी ने इसे बनाया है। वजन सिर्फ़ करीब 800 ग्राम। पायलट इसे अपनी survival vest (जैकेट) में लगाकर उड़ान भरते हैं। CSEL, जिसे युद्ध के दौरान फंसे पायलट या सैनिकों को सुरक्षित ढूंढने और बचाने के लिए विकसित किया गया है। यह एक छोटा उपकरण होता है, जिसमें GPS और सैटेलाइट कम्युनिकेशन तकनीक लगी होती है, जिससे सैनिक अपनी लोकेशन गुप्त तरीके से भेज सकते हैं।

 

यह कैसे काम करता है?

 

जब पायलट का विमान दुश्मन क्षेत्र में गिर जाता है, तो CSEL स्वचालित रूप से सक्रिय हो जाता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षित और बिना पकड़े जाने वाली  कम्युनिकेशन है। पारंपरिक रेडियो सिस्टम को दुश्मन आसानी से ट्रैक कर सकता है, लेकिन CSEL एन्क्रिप्टेड डिजिटल सिग्नल का उपयोग करता है, जिससे दुश्मन इसे पकड़ नहीं पाता।
यह encrypted (एन्क्रिप्टेड) और frequency-hopping सिग्नल भेजता है, जो दुश्मन के रडार या जामिंग सिस्टम को बैकग्राउंड नॉइज़ (साधारण शोर) जैसा लगता है।
सिग्नल मिलिट्री सैटेलाइट (जैसे SARSAT) के ज़रिए सीधे अमेरिका के कमांड सेंटर तक पहुँच जाता है।

पायलट को आवाज़ में बात करने की ज़रूरत नहीं पड़ती — बस छोटे-छोटे pre-programmed bursts (हर कुछ घंटे में) भेजकर अपनी लोकेशन, स्वास्थ्य की स्थिति और सुरक्षित जगह बता देता है। आखिरी स्टेज पर ही rescue टीम को exact लोकेशन मिलती है, जिससे दुश्मन को पता नहीं चलता।

 

हालिया घटना में कैसे काम आया?

 

अभी कुछ दिन पहले (अप्रैल 2026) ईरान में अमेरिका का F-15E Strike Eagle fighter jet मार गिराया गया।
पायलट तो जल्दी रेस्क्यू हो गए, लेकिन weapons systems officer (navigator) 48 घंटे तक ईरान की पहाड़ियों में दुश्मन के बीच छिपे रहे।  CSEL ने ही उन्हें जिंदा रखा — उन्होंने इसे इस्तेमाल करके बिना पकड़े US फोर्सेस को अपनी लोकेशन बताई। ईरान की IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) सैकड़ों सैनिकों के साथ तलाश रही थी, लेकिन CSEL का सिग्नल उन्हें समझ ही नहीं आया।

अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने आखिरकार डेयरिंग ऑपरेशन करके उन्हें सुरक्षित निकाल लिया। संक्षेप में: CSEL अमेरिकी पायलटों का “अदृश्य लाइफ़लाइन” है — दुश्मन इसे जाम नहीं कर पाता, ट्रैक नहीं कर पाता, लेकिन अमेरिकी सेना को रीयल-टाइम जानकारी देता रहता है। यही वजह है कि ईरान भी इसे “समझ” नहीं पाया!  

 

यह सिस्टम “over-the-horizon” कम्युनिकेशन की सुविधा देता है, यानी सैटेलाइट के माध्यम से बहुत लंबी दूरी तक संदेश भेज सकता है। इससे रेस्क्यू टीम किसी भी स्थान से सैनिक की सटीक लोकेशन जानकर उसे सुरक्षित निकाल सकती है। आधुनिक युद्ध ???ें यह तकनीक बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सैनिकों की सुरक्षा के साथ-साथ मिशन की गोपनीयता भी बनाए रखती है।