Science & Technology | 2009-04-26 09:05:00

 

1. इंडक्शन चूल्हे की कार्यप्रणाली

 

इंडक्शन चूल्हा पारंपरिक गैस की तरह सीधी आग नहीं देता, बल्कि फैराडे के विद्युत-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें बर्तन (तवा) के अंदर ही गर्मी पैदा होती है, यानी तवा खुद गर्म होता है, आग नहीं होती। यही वजह है कि इसकी हीटिंग प्रोसेस गैस से बिल्कुल अलग होती है।

 

2. सीधी आंच न मिलने की समस्या

 

रोटी को अच्छे से पकने और फूलने के लिए ऊपर और नीचे दोनों तरफ से तेज और समान गर्मी चाहिए होती है। गैस पर यह संभव होता है क्योंकि खुली आग मिलती है, लेकिन इंडक्शन में सिर्फ नीचे से ही तवा गर्म होता है। इस वजह से रोटी पूरी तरह नहीं फूल पाती और उसकी टेक्सचर भी अलग हो जाती है।

 

3. हीट डिस्ट्रीब्यूशन (गर्मी का फैलाव)

 

इंडक्शन में गर्मी पूरे तवे पर बराबर नहीं फैलती, बल्कि बीच में ज्यादा और किनारों पर कम होती है। इससे रोटी कभी एक जगह से जल जाती है और दूसरी तरफ से कच्ची रह जाती है, जिससे सही तरीके से पकाना मुश्किल हो जाता है।

 

4. तवे की बनावट का असर

 

इंडक्शन पर हर तवा काम नहीं करता। इसके लिए फेरोमैग्नेटिक (लोहे या स्टील) का तवा जरूरी होता है। अगर तवा पतला है तो जल्दी जल जाता है, और अगर बहुत मोटा है तो देर से गर्म होता है। इसलिए तवे की क्वालिटी और डिजाइन रोटी की क्वालिटी पर सीधा असर डालते हैं।

 

5. रोटी फूलने में दिक्कत

 

गैस पर रोटी को सीधे आग पर फुलाया जा सकता है, जिससे अंदर भाप बनती है और रोटी अच्छी तरह फूल जाती है। लेकिन इंडक्शन में ओपन फ्लेम नहीं होती, इसलिए यह प्रक्रिया पूरी तरह संभव नहीं होती और रोटी अक्सर सख्त या आधी फूली रह जाती है।

 

6. समाधान क्या हैं?

 

इंडक्शन पर अच्छी रोटी बनाने के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसे भारी और इंडक्शन-सपोर्टेड तवा इस्तेमाल करना, मीडियम-हाई हीट पर रोटी पकाना, बार-बार पलटना और हल्का दबाना। इन तरीकों से रोटी का टेक्सचर बेहतर किया जा सकता है।

 

निष्कर्ष

 

इंडक्शन पर रोटियां इसलिए अच्छी नहीं बनतीं क्योंकि इसमें सीधी आग नहीं होती और हीट का वितरण अलग होता है। लेकिन सही तवा और सही तकनीक अपनाकर इंडक्शन पर भी मुलायम और अच्छी रोटियां बनाई जा सकती हैं।