सिवनी के बिहिरिया गांव में शोक की लहर
Seoni जिले के छपारा क्षेत्र के बिहिरिया गांव में ‘डूंगरिया किंग’ नामक बैल के निधन से पूरा गांव शोक में डूब गया। जैसे ही उसके मरने की खबर फैली, लोगों के चेहरे उतर गए और गांव में सन्नाटा छा गया। यह घटना किसी आम पशु की मौत नहीं, बल्कि गांव के गौरव और पहचान के खत्म होने जैसी महसूस हुई।
कई खिताब जीतकर बनाया था खास मुकाम
‘डूंगरिया किंग’ ने ‘अखंड हिंद केसरी’ और ‘एमपी किंग’ जैसे प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किए थे। पट (दौड़) प्रतियोगिताओं में उसकी तेज रफ्तार और दमदार प्रदर्शन के कारण वह अलग पहचान बना चुका था। उसने मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जीत हासिल की और गांव का नाम रोशन किया।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
बैल की अंतिम यात्रा में गांव के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लोग उसे अंतिम विदाई देने पहुंचे। यह दृश्य दर्शाता है कि ‘डूंगरिया किंग’ केवल एक जानवर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों से जुड़ा हुआ एक खास हिस्सा था।
पूरे सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार
बैल के मालिक अजीम पटेल ने पूरे धार्मिक और पारंपरिक विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। बैल को फूल-मालाओं से सजाया गया और लोगों ने नम आंखों से उसे श्रद्धांजलि दी। यह सम्मान उस जुड़ाव और प्यार को दिखाता है जो लोगों के दिलों में उसके लिए था।
इंसान और पशु के बीच गहरा रिश्ता
इस घटना ने यह साफ कर दिया कि इंसान और पशु के बीच संबंध सिर्फ उपयोग तक सीमित नहीं होते, बल्कि भावनात्मक भी होते हैं। ‘डूंगरिया किंग’ ने अपने प्रदर्शन और व्यवहार से लोगों के दिलों में खास जगह बना ली थी, इसलिए उसकी विदाई ने सभी को भावुक कर दिया।
गांव की पहचान बन चुका था ‘डूंगरिया किंग’
गांव के लोग उसे अपने गर्व के रूप में देखते थे। उसकी जीत और उपलब्धियों ने बिहिरिया गांव को पहचान दिलाई थी। आज भी लोग उसकी उपलब्धियों को याद कर भावुक हो रहे हैं और उसे एक हीरो की तरह याद कर रहे हैं।
समाज के लिए एक भावनात्मक संदेश
यह घटना यह सिखाती है कि संवेदनाएं केवल इंसानों तक सीमित नहीं होतीं। जानवर भी हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन सकते हैं और उनके प्रति सम्मान और प्यार दिखाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।