FCRA का पूरा नाम है Foreign Contribution (Regulation) Act — यानी विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम।
यह भारत का वह कानून है जो विदेश से आने वाले दान/फंड को नियंत्रित करता है।
इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी पैसा भारत की राजनीति, समाज, धर्म या सरकारी नीतियों को गलत तरीके से प्रभावित न करे।
विदेशी फंड का पारदर्शी और सही उपयोग हो।
FCRA कानून के उद्देश्य
- विदेशी प्रभाव को रोकना (खासकर राजनीति और धार्मिक गतिविधियों में)
- विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना
- यह सुनिश्चित करना कि विदेशी पैसा राष्ट्रीय हितों के खिलाफ न जाए
- NGOs और संस्थाओं के लिए नियम और सीमाएँ तय करना
किन्हें FCRA की अनुमति (लाइसेंस) चाहिए?
निम्न संस्थाएं अगर विदेश से पैसा लेना चाहती हैं, तो उन्हें FCRA रजिस्ट्रेशन कराना होता है:
- NGOs
- ट्रस्ट / सोसाइटी
- धार्मिक संस्थान
- शैक्षणिक संस्थान
- सामाजिक संगठनों के समूह
- बिना FCRA लाइसेंस विदेशी फंड लेना गैरकानूनी है।
कौन FCRA के तहत विदेशी फंड नहीं ले सकता?
- राजनीतिक दल
- चुनाव उम्मीदवार
- पत्रकार (कुछ श्रेणियों में)
- विधायक/सांसद/सरकारी कर्मचारी
- मीडिया संस्थान (कुछ प्रतिबंध लागू)
FCRA फंड का उपयोग कैसे करना होता है?
- फंड एक अलग बैंक अकाउंट में रखना होता है
- हर खर्च का रिकॉर्ड रखना जरूरी है
- सरकार को वार्षिक रिटर्न (FCRA Annual Return) जमा करना पड़ता है
- पैसा सिर्फ घोषित उद्देश्य के लिए ही खर्च किया जा सकता है