Science & Technology | 2026-11-03 04:53:43
Download PDF

1. सन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है?

सन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Embodied Artificial Intelligence) ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को कहा जाता है जो किसी भौतिक इकाई—जैसे रोबोट—के माध्यम से वास्तविक दुनिया को समझती है और उसमें क्रियाएँ करती है।

सामान्य डिजिटल एआई मुख्यतः पाठ, चित्र, ध्वनि या अन्य डिजिटल आँकड़ों पर काम कर सकती है। इसके विपरीत, सन्निहित एआई को भौतिक वातावरण से जानकारी प्राप्त करके वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करना होता है।

उदाहरण के लिए, किसी रोबोट को मेज पर रखा कप उठाना हो, तो उसे कप की स्थिति पहचाननी होगी, दूरी का अनुमान लगाना होगा, हाथ की गति नियंत्रित करनी होगी और कप को गिराए बिना पकड़ना होगा।

2. ह्यूमनॉइड रोबोट क्या हैं?

ह्यूमनॉइड रोबोट ऐसे रोबोट होते हैं जिनकी बाहरी बनावट या कार्यात्मक संरचना मानव शरीर से मिलती-जुलती होती है। इनमें सिर, धड़, हाथ और पैर जैसे अंग हो सकते हैं।

इनका उद्देश्य केवल मानव जैसा दिखना नहीं है। इन्हें ऐसे वातावरण में कार्य करने के लिए भी विकसित किया जा सकता है जो मनुष्यों के लिए बनाए गए हैं, जैसे सीढ़ियाँ, दरवाजे, कारखाने और घरेलू स्थान।

मुख्य घटक

  1. सेंसर: कैमरे, दूरी मापने वाले उपकरण, स्पर्श-सेंसर और अन्य उपकरण वातावरण से जानकारी प्राप्त करते हैं।
  2. कंप्यूटर दृष्टि: वस्तुओं, लोगों और आसपास की संरचनाओं को पहचानने में सहायता करती है।
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल: प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करके कार्यों की योजना बनाने में सहायता करते हैं।
  4. एक्चुएटर और मोटर: रोबोट के हाथ, पैर और अन्य अंगों को गति प्रदान करते हैं।
  5. नियंत्रण प्रणाली: संतुलन, गति, पकड़ और समन्वय बनाए रखती है।
  6. सीखने की प्रणाली: प्रशिक्षण और अनुभव के आधार पर कार्य-प्रदर्शन में सुधार करने में सहायता करती है।

3. सन्निहित एआई किस प्रकार काम करती है?

सन्निहित एआई को समझने के लिए निम्नलिखित कार्य-चक्र महत्त्वपूर्ण है:

धारणा → निर्णय एवं योजना → क्रिया → प्रतिक्रिया → सीखना

चरणकार्यउदाहरण
धारणासेंसरों से वातावरण की जानकारी प्राप्त करनाकप को पहचानना
निर्णयलक्ष्य और संभावित क्रिया का निर्धारणकप तक हाथ पहुँचाने की योजना
क्रियामोटर और अन्य उपकरणों को नियंत्रित करनाहाथ को कप की ओर ले जाना
प्रतिक्रियाक्रिया के परिणाम का आकलन करनाजाँचना कि कप सही ढंग से पकड़ा गया या नहीं
सीखनाअनुभव के आधार पर व्यवहार में सुधार करनापकड़ की शक्ति समायोजित करना

इस प्रक्रिया में वास्तविक दुनिया से प्राप्त प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होती है, क्योंकि भौतिक वातावरण में अनिश्चितता, घर्षण, वजन और वस्तुओं की स्थिति बदल सकती है।

4. सामान्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अंतर

आधारसामान्य डिजिटल कृत्रिम बुद्धिमत्तासन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता
कार्य का क्षेत्रमुख्यतः डिजिटल वातावरणभौतिक और डिजिटल वातावरण
इनपुटपाठ, चित्र, ध्वनि और डिजिटल आँकड़ेसेंसर, कैमरे तथा अन्य डिजिटल इनपुट
आउटपुटउत्तर, अनुमान, चित्र या सामग्रीनिर्णय के साथ भौतिक क्रिया भी
प्रमुख चुनौतीसटीकता, संदर्भ और विश्वसनीयताइन चुनौतियों के अतिरिक्त गति, संतुलन और भौतिक सुरक्षा
उदाहरणप्रश्नों का उत्तर देने वाला एआई सहायकवस्तुओं को उठाने वाला रोबोट

यह अंतर पूर्णतः कठोर नहीं है। आधुनिक एआई प्रणालियाँ डिजिटल और भौतिक दोनों प्रकार के कार्यों को एकीकृत कर सकती हैं।

5. रोबोटिक्स में प्रमुख तकनीकी अवधारणाएँ

क. मशीन लर्निंग (Machine Learning)

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वह शाखा है जिसमें प्रणालियाँ आँकड़ों और अनुभव से प्रतिरूप सीखती हैं। रोबोटों को वस्तुओं की पहचान, गति-नियंत्रण और कार्यों के निष्पादन में प्रशिक्षित किया जा सकता है।

ख. गहन अधिगम (Deep Learning)

यह बहुस्तरीय कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क का उपयोग करके जटिल प्रतिरूप सीखने की तकनीक है। कंप्यूटर दृष्टि और ध्वनि पहचान में इसका व्यापक उपयोग होता है।

ग. सुदृढीकरण अधिगम (Reinforcement Learning)

इस पद्धति में प्रणाली अपने कार्यों के परिणामों के आधार पर व्यवहार सीखती है। उसे लक्ष्य के अनुरूप पुरस्कार या दंड-सदृश संकेत दिए जा सकते हैं।

घ. अनुकरण-आधारित प्रशिक्षण (Simulation-Based Training)

रोबोट को आभासी वातावरण में प्रशिक्षित करके अनेक परिस्थितियों का परीक्षण किया जा सकता है। इसके बाद वास्तविक दुनिया में परीक्षण आवश्यक रहता है, क्योंकि अनुकरण और वास्तविक वातावरण में अंतर हो सकता है।

ङ. बहु-माध्यमीय एआई (Multimodal AI)

यह पाठ, चित्र, ध्वनि और अन्य प्रकार की सूचनाओं को एक साथ संसाधित कर सकती है। रोबोट को आदेश समझने और दृश्य वातावरण के अनुसार कार्य करने में इससे सहायता मिल सकती है।

6. ह्यूमनॉइड रोबोटों के संभावित अनुप्रयोग

1. विनिर्माण एवं उद्योग: सामान उठाना, उपकरणों तक पहुँचना, निरीक्षण करना और दोहराए जाने वाले कार्य करना।

2. स्वास्थ्य सेवाएँ: पुनर्वास, अस्पतालों में सहायक कार्य और कुछ देखभाल संबंधी गतिविधियाँ। इन उपयोगों के लिए सुरक्षा तथा चिकित्सकीय मानकों का पालन आवश्यक है।

3. आपदा प्रबंधन: आग, मलबे या अन्य जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में निरीक्षण और खोज एवं बचाव कार्यों में सहायता।

4. कृषि: कुछ परिस्थितियों में फसल निरीक्षण, सामग्री का परिवहन और दोहराए जाने वाले कार्यों में सहायता।

5. घरेलू सेवाएँ: वस्तुओं को व्यवस्थित करना, घरेलू उपकरणों के साथ कार्य करना और सीमित सहायक गतिविधियाँ।

6. शिक्षा एवं अनुसंधान: रोबोटिक्स, स्वचालन, सेंसर तकनीक और मानव-मशीन अंतःक्रिया का अध्ययन।

इन अनुप्रयोगों की व्यावहारिक उपयोगिता रोबोट की लागत, विश्वसनीयता, ऊर्जा खपत, रखरखाव और कार्यस्थल की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

7. चीन में इस क्षेत्र पर बढ़ता ध्यान क्यों महत्त्वपूर्ण है?

चीन का विनिर्माण आधार, रोबोटिक्स उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान इस क्षेत्र में विकास के लिए महत्त्वपूर्ण परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।

ह्यूमनॉइड रोबोटों के विकास में केवल बेहतर एआई मॉडल बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सेंसर, मोटर, बैटरी, नियंत्रण प्रणालियों, कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े पैमाने पर विनिर्माण का समन्वय आवश्यक है।

मुख्य प्रतिस्पर्धी क्षेत्र

  1. अधिक सक्षम एआई मॉडल विकसित करना।
  2. रोबोटों को वास्तविक दुनिया के कार्यों के लिए प्रशिक्षित करना।
  3. गति और संतुलन में सुधार करना।
  4. हार्डवेयर की लागत और ऊर्जा खपत घटाना।
  5. सुरक्षित तथा विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करना।
  6. वास्तविक परिस्थितियों से पर्याप्त प्रशिक्षण आँकड़े प्राप्त करना।

हालाँकि, किसी देश में विकास की गति का आकलन केवल घोषणाओं या प्रदर्शनों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक कार्य-क्षमता, लागत, सुरक्षा और व्यावसायिक उपयोग के प्रमाण भी महत्त्वपूर्ण हैं।

8. प्रमुख चुनौतियाँ और जोखिम

क. वास्तविक दुनिया की अनिश्चितता

वस्तुओं का आकार, वजन, सतह और स्थिति बदल सकती है। रोबोट को ऐसे परिवर्तनों के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी होती है।

ख. सुरक्षा

रोबोट के संतुलन बिगड़ने, गलत गति करने या किसी वस्तु को अनुचित तरीके से पकड़ने से मनुष्यों और संपत्ति को नुकसान पहुँच सकता है।

ग. विश्वसनीयता

प्रयोगशाला में सफल प्रदर्शन का अर्थ यह नहीं है कि रोबोट हर परिस्थिति में लगातार और सुरक्षित रूप से कार्य कर सकेगा।

घ. साइबर सुरक्षा

नेटवर्क से जुड़े रोबोटों पर अनधिकृत नियंत्रण, सॉफ्टवेयर में हस्तक्षेप या डेटा चोरी का जोखिम हो सकता है।

ङ. गोपनीयता

कैमरे और अन्य सेंसर कार्यस्थल या घर के लोगों से संबंधित संवेदनशील जानकारी एकत्र कर सकते हैं। इस डेटा का उपयोग और भंडारण सुरक्षित होना चाहिए।

च. रोजगार पर प्रभाव

स्वचालन कुछ कार्यों की माँग घटा सकता है, जबकि रोबोट रखरखाव, प्रोग्रामिंग, डिजाइन और तकनीकी पर्यवेक्षण जैसे नए कार्य भी पैदा कर सकता है। प्रभाव विभिन्न उद्योगों और कौशल स्तरों में अलग-अलग होगा।

छ. लागत और ऊर्जा

जटिल रोबोटों का निर्माण, संचालन, रखरखाव और ऊर्जा प्रबंधन महँगा हो सकता है। इस कारण व्यापक उपयोग में आर्थिक व्यवहार्यता महत्त्वपूर्ण है।

9. भारत के लिए संभावनाएँ

भारत में ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स और सन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन में नए अवसर पैदा कर सकता है।

प्रमुख अवसर

  1. स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास: एआई मॉडल, सेंसर, मोटर और नियंत्रण प्रणालियों में घरेलू क्षमता बढ़ाना।
  2. उद्योग-अकादमिक सहयोग: विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच संयुक्त परियोजनाएँ विकसित करना।
  3. कौशल विकास: रोबोटिक्स, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेक्ट्रॉनिक्स में प्रशिक्षण देना।
  4. स्टार्टअप को प्रोत्साहन: भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कम लागत वाले रोबोटिक समाधान विकसित करना।
  5. परीक्षण अवसंरचना: सुरक्षित परीक्षण प्रयोगशालाएँ और वास्तविक परिस्थितियों में मूल्यांकन की सुविधाएँ विकसित करना।
  6. स्थानीय आवश्यकताओं पर ध्यान: ऐसे रोबोट विकसित करना जो भारतीय कारखानों, अस्पतालों और अन्य स्थानीय वातावरणों में उपयोगी हों।

10. भारत के लिए आगे की राह

भारत को केवल मानव-सदृश रोबोटों के प्रदर्शन पर ध्यान देने के बजाय उपयोगी और विश्वसनीय कार्य-क्षमता विकसित करनी चाहिए।

  • दीर्घकालिक रोबोटिक्स अनुसंधान और स्वदेशी हार्डवेयर में निवेश बढ़ाया जाए।
  • विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्टार्टअप के बीच सहयोग मजबूत किया जाए।
  • कार्यस्थल पर रोबोटों की सुरक्षा और परीक्षण के स्पष्ट मानक बनाए जाएँ।
  • श्रमिकों के पुनःकौशल विकास और नए तकनीकी रोजगारों के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
  • रोबोटों में एकत्रित डेटा की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • उच्च जोखिम वाले अनुप्रयोगों में मानवीय निगरानी और जवाबदेही स्पष्ट रखी जाए।

11. निष्कर्ष

सन्निहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स को निर्देशों का पालन करने वाली प्रणालियों से आगे बढ़ाकर ऐसी प्रणालियों की ओर ले जा रही है जो वातावरण को समझकर कार्य कर सकती हैं। फिर भी, अधिक उन्नत व्यवहार का अर्थ वास्तविक मानवीय सोच या चेतना होना नहीं है। भारत के लिए इस क्षेत्र में सफलता का आधार स्वदेशी अनुसंधान, किफायती तकनीक, प्रशिक्षित कार्यबल और सुरक्षित एवं जिम्मेदार नवाचार होगा।